आजमगढ़, उत्तर प्रदेश – जिले के सरकारी अस्पताल में भर्ती टीबी (क्षय रोग) मरीज राजू की हालत बिगड़ने के बाद स्वास्थ्य सुविधाओं पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के चलते राजू की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है।
इलाज में देरी, दवाइयों की कमी का आरोप
राजू, जो कि आजमगढ़ शहर के पास के एक गांव का निवासी है, कुछ हफ्ते पहले खांसी, बुखार और कमजोरी की शिकायत के बाद जिला अस्पताल में भर्ती हुआ था। प्रारंभिक जांच में उसे टीबी का मरीज पाया गया। हालांकि परिजनों का कहना है कि न तो समय पर दवा दी जा रही है और न ही डॉक्टर समय से देखने आ रहे हैं।
राजू के भाई सुरेश यादव ने बताया
> "हमने कई बार नर्स और डॉक्टरों से गुहार लगाई लेकिन कोई ध्यान नहीं दे रहा। दवाइयां बाहर से मंगवानी पड़ रही हैं और मरीज की हालत दिन पर दिन बिगड़ रही है।"
प्रशासन की सफाई
अस्पताल प्रशासन ने इन आरोपों से इनकार किया है। अस्पताल अधीक्षक डॉ. आर.पी. सिंह ने कहा,
> "राजू को पूरी चिकित्सा सुविधा दी जा रही है। टीबी के मरीजों को खास निगरानी में रखा जाता है और उसकी हालत पहले से थोड़ी बेहतर है।"
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
यह मामला ऐसे वक्त में सामने आया है जब उत्तर प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए कई योजनाएं चला रही है। बावजूद इसके, ज़मीनी स्तर पर सरकारी अस्पतालों की लचर व्यवस्था आम लोगों के लिए बड़ी समस्या बन चुकी है।
राजू के इलाज को लेकर आसपास के लोगों में भी आक्रोश है। उनका कहना है कि गरीब मरीजों को न दवा मिल रही है और न इलाज, जिससे टीबी जैसी जानलेवा बीमारी और फैलने का खतरा है।
परिजनों और स्थानीय समाजसेवियों ने प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराने और दोषी मेडिकल स्टाफ पर कार्रवाई की मांग की है।
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