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7 किमी लंबी सुरंग की योजना
सरकार ने चौमासी से लिंचोली तक लगभग 7 किलोमीटर लंबी एक सुरंग बनाने की योजना बनाई है। यह सुरंग सीधे पैदल मार्ग को जोड़ेगी और इससे यात्रियों का पैदल चलने का सफर 11 किलोमीटर तक घट जाएगा।
अभी भक्तों को गौरीकुंड से केदारनाथ पहुंचने में करीब 16-18 किलोमीटर का ट्रेक करना होता है। लेकिन सुरंग बनने के बाद यह रास्ता अधिक छोटा, सुरक्षित और सुगम हो जाएगा।
हर मौसम में यात्रा होगी संभव
इस सुरंग के बनने से बर्फबारी या बारिश जैसे मौसम की बाधाएं खत्म हो जाएंगी। यानी श्रद्धालु अब गर्मी, सर्दी या बारिश — किसी भी मौसम में केदारनाथ यात्रा कर सकेंगे। यह योजना तीर्थ यात्रियों के लिए एक ऐतिहासिक बदलाव साबित हो सकती है।
सुरंग निर्माण की प्रक्रिया
परियोजना की योजना केंद्र सरकार और उत्तराखंड सरकार द्वारा मिलकर तैयार की जा रही है। इसके लिए भूमि सर्वेक्षण और तकनीकी अध्ययन शुरू हो चुके हैं।
इस सुरंग का निर्माण मॉडर्न टनलिंग टेक्नोलॉजी से किया जाएगा, ताकि पर्यावरण को न्यूनतम नुकसान पहुंचे और सुरक्षा भी सुनिश्चित हो।
पर्यावरण पर क्या असर होगा?
सरकार का दावा है कि इस प्रोजेक्ट को इस तरह डिज़ाइन किया जाएगा कि पर्यावरण को कम से कम नुकसान पहुंचे। साथ ही यात्रा के दौरान जंगलों और कठिन रास्तों से गुजरने की जरूरत भी नहीं होगी।
यात्रियों को क्या मिलेगा लाभ?
रास्ता छोटा होगा (11 किमी की कमी)
जोखिम कम होगा (बर्फ और भूस्खलन से राहत)
हर मौसम में यात्रा संभव
बुजुर्ग और दिव्यांग यात्रियों के लिए सुविधाजनक
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